हम अल्ला और ईश्वर का खूबसूरत तौफा है।
तौफा बनाते वक्त हममे ना भेद हुआ है।
भेद सिर्फ औरत और मर्द का हुआ हैं।
कुछ रखवालदारों ने हमें जाती मैं बाटा है ।
हमनें आँख बन्द करके उसे स्वीकार किया है ।
दिखाने मै हम एक जैसे ही है ।
फर्क सिर्फ पहराव और संस्कृति का है ।
हम सब अपनी अपनी रोटी कमाने मै मग्न है ।
कुछ लोग हमारे नाम पर अपनी रोटिया शेखते है ।
अपने स्वार्थ के लिये कुछ लोग हमें बाटते फिरते है ।
पागल हम उन्ही ही अपना मसीहा मानकर बैठे हैं ।
कोई अल्ला का नाम लेके हमें भड़कता हैं।
तो कोई भगवान के नाम पे हमें लूटता हैँ।
हमें तो सिर्फ नेक रास्ते पर ही चलना अब तय करना हैँ।
अब इंसानियत के नाते हमें एक दूसरे के साथ चलना हैँ।
- यशवंत द. ओव्हाळ
https://yashovhal23.blogspot.com
No comments:
Post a Comment